प्यार तुझको भी है,
प्यार मुझको भी है,
पर इश प्यार की राहो में,
जाने का इनकार तुझको भी है,
इनकार मुझको भी है !
तेरी नीगाहे देखती राह मेरी है
नीगाहे मेरी भी देखती राह तेरी है,
नगरे क्यो झुका लेते हो
देख के मुझको,
ह्या से आ जाती लाली
तेरे गालो में
क्यो देख के मुझको !
तुम्हारी झुकी नीगाहे हर वक्त
कहती है कुछ बाते मुझसे,
इकरार करने की चाहत है इनमे
पर ये कह ना पातीहै मुझसे ;
सपनो में खो जाने की चाहत है तुझमे,
चाहत है प्यार से प्यार पाने की तुझमे,
अपने अहसासों को दिल में झुपाए रखे हो,
न जाने कीश पल का इंतज़ार है तुम्हे !
उत्तम कविता , मुझे ये नए प्रेमी द्वारा लिखी गई कविता लगती है, उन्हें प्रेम तो है पर हया भी
ReplyDeleteधन्यवाद
मयूर
अपनी अपनी डगर
बहुत ही अच्छी रचना
ReplyDeleteबहुत-२ आभार
Achhi prayas.Lekin pahale padhai phir pyar..........
ReplyDeleteइस सुन्दर रचना के लिए धन्यवाद
ReplyDeleteनव वर्ष की शुभ कामनाएं
kya baat hai sir jee, bade pyar-shyar ki baat kar rahe ho??????????
ReplyDeletemajra kya hai???????
kiske liye ye sab likha hai?????????