Thursday, August 20, 2009

'एक अहसाश'

प्यार तुझको भी है,
प्यार मुझको भी है,
पर इश प्यार की राहो में,
जाने का इनकार तुझको भी है,
इनकार मुझको भी है !

तेरी नीगाहे देखती राह मेरी है
नीगाहे मेरी भी देखती राह तेरी है,

नगरे क्यो झुका लेते हो
देख के मुझको,
ह्या से जाती
लाली
तेरे गालो में
क्यो देख के मुझको !

तुम्हारी झुकी नीगाहे हर वक्त
कहती है कुछ बाते मुझसे,
इकरार करने की चाहत है इनमे
पर ये कह ना पातीहै मुझसे ;

सपनो में खो जाने की चाहत है तुझमे,
चाहत है प्यार से प्यार पाने की तुझमे,
अपने अहसासों को दिल में झुपाए रखे हो,
जाने कीश पल का इंतज़ार है तुम्हे !


5 comments:

  1. उत्तम कविता , मुझे ये नए प्रेमी द्वारा लिखी गई कविता लगती है, उन्हें प्रेम तो है पर हया भी
    धन्यवाद
    मयूर
    अपनी अपनी डगर

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  2. बहुत ही अच्छी रचना
    बहुत-२ आभार

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  3. Achhi prayas.Lekin pahale padhai phir pyar..........

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  4. इस सुन्दर रचना के लिए धन्यवाद
    नव वर्ष की शुभ कामनाएं

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  5. kya baat hai sir jee, bade pyar-shyar ki baat kar rahe ho??????????
    majra kya hai???????
    kiske liye ye sab likha hai?????????

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