वो मुलाकात एक बहाना था,
कुछ बाते थी जो तुम्हे बताना था,
कहा भी बहुत सुना भी बहुत,
पर कह न पाया जो तुम्हे बताना था,
वो मुलाकात एक बहाना था !
सोचा क्या ये कहने की बात है,
या महसूस करने की;
जो ये राज है छुपा ,
हमारे तुम्हारे दील में !
कुछ तो खाश थी उस मुलाकात में,
बढती गयी हमारी धड़कने,
न रोका हमने एक-दुसरे को,
कहने और सुनने के दौर में,
पर, वो मुलाकात एक बहाना था !
दील में थी कुछ बाते तुम्हारे भी, छुपी;
आँखों ने कहा पर कह न पाया तुमने,
जागी कुछ बाते तुम्हारे भी दील में,
तुमने सोचा.............
क्या, वो मुलाकात एक बहाना था !
अब एक अहसास है एक खालीपन का,
इस जींदगी में...........
दील में चाहत है, तुमसे;
कुछ कहने की और सुनने की,
फीर एक मुलाकात में.........
पर,वो मुलाकात एक बहाना था !
Bahut achchha likha hai aapne
ReplyDeletegood Subodh,sensitive poem.Welcome to blogjagat.
ReplyDeletePl mind the spellings in Hindi for better expression
Dr.Bhoopendra
achchh kikha hai aapne subodh jee.
ReplyDeleteसुन्दर रचना.....पर थोडा शब्दों को सुधार लें लिखते हुवे गलत लिखे गए
ReplyDeleteस्वागत है, शुभकामनायें.
ReplyDeleteहुज़ूर आपका भी .......एहतिराम करता चलूं .....
ReplyDeleteइधर से गुज़रा था- सोचा- सलाम करता चलूं ऽऽऽऽऽऽऽऽ
कृपया एक अत्यंत-आवश्यक समसामयिक व्यंग्य को पूरा करने में मेरी मदद करें। मेरा पता है:-
www.samwaadghar.blogspot.com
शुभकामनाओं सहित
संजय ग्रोवर
samvadoffbeat@yahoo.co.in
mulakat bahana tha, ya bahane se mulakat hui, narayan narayan
ReplyDeleteहिंदी ब्लॉग की दुनिया में आपका तहेदिल से स्वागत है....
ReplyDeleteबहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्लाग जगत में स्वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
ReplyDeleteबहुत सुंदर.हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं। मेरे ब्लोग पर भी आने की जहमत करें।
ReplyDeletewell done....& welcome to my blog...
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