तलाशती है नज़रे तुम्हे, हंशी फीजाओ में ;
न पा के तुम्हे खालिपान का अह्शाश दीलाती है!
हवा के ये झोंके कुछ हंशी याद दीलाती है;
तुझसे की हुई बाते याद आती है!
तेरे हंशी की खनक है इन हवाओ में ;
जो, एक संगीत सा मधुर तान सुनती है!
इन हवाओ में खुशबु की कमी सी लगती है ;
ये, तुम्हरे ना होने का अहसास दीलाती है!
झील के कीनारे कोई 'परी' नही दीखती है;
ये तुम्हारे ना होने का अहसास दीलाती है!
यु ही बस हर वक्त जुदाई सी लगती है....................
Monday, May 18, 2009
Wednesday, May 13, 2009
"एक बहाना"
वो मुलाकात एक बहाना था,
कुछ बाते थी जो तुम्हे बताना था,
कहा भी बहुत सुना भी बहुत,
पर कह न पाया जो तुम्हे बताना था,
वो मुलाकात एक बहाना था !
सोचा क्या ये कहने की बात है,
या महसूस करने की;
जो ये राज है छुपा ,
हमारे तुम्हारे दील में !
कुछ तो खाश थी उस मुलाकात में,
बढती गयी हमारी धड़कने,
न रोका हमने एक-दुसरे को,
कहने और सुनने के दौर में,
पर, वो मुलाकात एक बहाना था !
दील में थी कुछ बाते तुम्हारे भी, छुपी;
आँखों ने कहा पर कह न पाया तुमने,
जागी कुछ बाते तुम्हारे भी दील में,
तुमने सोचा.............
क्या, वो मुलाकात एक बहाना था !
अब एक अहसास है एक खालीपन का,
इस जींदगी में...........
दील में चाहत है, तुमसे;
कुछ कहने की और सुनने की,
फीर एक मुलाकात में.........
पर,वो मुलाकात एक बहाना था !
कुछ बाते थी जो तुम्हे बताना था,
कहा भी बहुत सुना भी बहुत,
पर कह न पाया जो तुम्हे बताना था,
वो मुलाकात एक बहाना था !
सोचा क्या ये कहने की बात है,
या महसूस करने की;
जो ये राज है छुपा ,
हमारे तुम्हारे दील में !
कुछ तो खाश थी उस मुलाकात में,
बढती गयी हमारी धड़कने,
न रोका हमने एक-दुसरे को,
कहने और सुनने के दौर में,
पर, वो मुलाकात एक बहाना था !
दील में थी कुछ बाते तुम्हारे भी, छुपी;
आँखों ने कहा पर कह न पाया तुमने,
जागी कुछ बाते तुम्हारे भी दील में,
तुमने सोचा.............
क्या, वो मुलाकात एक बहाना था !
अब एक अहसास है एक खालीपन का,
इस जींदगी में...........
दील में चाहत है, तुमसे;
कुछ कहने की और सुनने की,
फीर एक मुलाकात में.........
पर,वो मुलाकात एक बहाना था !
Tuesday, May 5, 2009
"ये दुरीया"
ये क्या है जीसका अहसास है,
कानो में कुछ संगीत सा अहसास है,
शायद ' ये तो उनकी गुलाबी मुश्कान है!
इन दुरीयो में भी कुछ खाश है,
तन्हाईया देती कुछ अहसास है,
शायद' अब उनका इन्तेजार है!
उनकी मासूमीयत में कुछ बात है,
जो हमेशा बुलाती मुझे पास है,
शायद इशी का मुझे ख्याल है!
...............................
पूछती है 'ये 'दुरीया'
क्या तुमहारे पास है....!
क्या उन्हें भी तुम्हारा,
ख्याल है....!
क्या उन्हें भी इस्का अहसास.....!
कानो में कुछ संगीत सा अहसास है,
शायद ' ये तो उनकी गुलाबी मुश्कान है!
इन दुरीयो में भी कुछ खाश है,
तन्हाईया देती कुछ अहसास है,
शायद' अब उनका इन्तेजार है!
उनकी मासूमीयत में कुछ बात है,
जो हमेशा बुलाती मुझे पास है,
शायद इशी का मुझे ख्याल है!
...............................
पूछती है 'ये 'दुरीया'
क्या तुमहारे पास है....!
क्या उन्हें भी तुम्हारा,
ख्याल है....!
क्या उन्हें भी इस्का अहसास.....!
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