Wednesday, April 29, 2009

इक मुलाकात

ख्वाबो में इक मुलाकात हूई,
हां पहली बार हूई;

उस 'परी ' से मुलाकात हूई,
आँखों-आँखों में कुछ बात हूई;

ना जाने क्या बात हूई,
उनकी हंशी से मुलाकात हूई;

जुल्फे थी खुली हूई,
हवा के झोंको से उड़ती हूई;

होठ गुलाब सी खीली हूई,
पंखुडियों सी मीली हूई;

चाँद की चांदनी साथ हूई,
'परी ' दीलके पास हूई;

दील में ऐशी कुछ बात हूई,
हमें भी कुछ अहशास हूई;

पर............

ख्वाबो की ये बात थी,
नींद खुली तो रात थी..................

1 comment:

  1. ये सच ही कहा गया है की "प्यार आदमी के वजूद को महान बना देता हैं "
    आपके लिए कुछ पंतिया मेरे मन में आई है..........
    रात की तन्हाइयों में उसे याद किया करते हैं,
    दिल की गहराइयों से उसे प्यार किया करते है,
    मुझे तो पता न था, घर वालों ने बताया,
    कि हम नींद में भी उसका नाम लिया करते है..........
    वैसे आपके सच में बहुत ही उम्मदा ख्वाब हैं......
    It's very nice

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