ख्वाबो में इक मुलाकात हूई,
हां पहली बार हूई;
उस 'परी ' से मुलाकात हूई,
आँखों-आँखों में कुछ बात हूई;
ना जाने क्या बात हूई,
उनकी हंशी से मुलाकात हूई;
जुल्फे थी खुली हूई,
हवा के झोंको से उड़ती हूई;
होठ गुलाब सी खीली हूई,
पंखुडियों सी मीली हूई;
चाँद की चांदनी साथ हूई,
'परी ' दीलके पास हूई;
दील में ऐशी कुछ बात हूई,
हमें भी कुछ अहशास हूई;
पर............
ख्वाबो की ये बात थी,
नींद खुली तो रात थी..................
ये सच ही कहा गया है की "प्यार आदमी के वजूद को महान बना देता हैं "
ReplyDeleteआपके लिए कुछ पंतिया मेरे मन में आई है..........
रात की तन्हाइयों में उसे याद किया करते हैं,
दिल की गहराइयों से उसे प्यार किया करते है,
मुझे तो पता न था, घर वालों ने बताया,
कि हम नींद में भी उसका नाम लिया करते है..........
वैसे आपके सच में बहुत ही उम्मदा ख्वाब हैं......
It's very nice