एक ख्वाब देखा है मैंने
इस बार देखा है मैंने,
सपनो में है सजाया
दील में है बशाया ,
कहना तो कुछ चाह
लेकीन कह न पाया,
एक ख्वाब देखा है मैंने
इस बार देखा है मैंने,
उस्को ना बताया की
तुझे दील में है बसाया,
सोचा,
कह दू उशे, पर कह न पाया,
एक ख्वाब देखा है मैंने
इस बार देखा है मैंने,
सपनो में आ के, वो
मुझको सताये,
अपनी हंशी से
वो मुझको हंशाये ,
एक ख्वाब देखा है मैंने
इस बार देखा है मैंने
उशकी हंशी जब याद आए
दील में कुछ ख्वाब जगाये,
कुछ कहना तो वो भी चाहे
पर कह न पाये,
एक ख्वाब देखा है मैंने
इस बार देखा है मैंने,
its a beautiful poem.. i loved it :)
ReplyDeleteachchhi shuruat hai.Lage rahein.
ReplyDeleteउशकी हंशी जब याद आए
ReplyDeleteदील में कुछ ख्वाब जगाये,
कुछ कहना तो वो भी चाहे
पर कह न पाये,
एक ख्वाब देखा है मैंने
इस बार देखा है मैंने,
really nice....
achha khwab dekha hai aapne
एक ख्वाब देखा है मैंने
ReplyDeleteइस बार देखा है मैंने
in khwabo ki gahrai mai
tumhari baaton ki sacchai ne
hamhe bhi majboor kiya hai
do pankti hi sahi likhe
kavi to nahi par kavita to kare
hum wahan hain jahan se humko bhi hamari khabar nahi aati , sabdon ko samajhane ki kosis kar rahe ho matlab abhi bhi jindgi ki talas khatm nahi hui hai .
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