Wednesday, July 28, 2010

"ये मन"

जरा गौर फरमाइयेगा! ये एक वैसे मन की बाते है जो थोडा अशांत है या यु कहे की कुछ समझ नहीं पा रहा है और कुछ कहना चाह रहा है!

ये मन"

कुछ बीते लम्हों की याद करता, सोचता,
क्यों वर्तमान को भी भूल जाता है ये मन!

ये मन चंचल-नटखट-था-या-है,
क्यों ये समझ पाता है ये मन!

काजल सी अँधेरी रातो में खुली आँखों से,
ना जाने! क्या देखता.... क्या ढूंढता.... क्या पाता.... है ये मन!

हसीं 'परी' के सपनो में खोया रहता था ये मन.............
क्या? खो गयी है वो 'परी' या खुद खो गया है ये मन!

कुछ अधूरे सपने....कुछ टूटे और बिखरे सपने,
ना जाने क्यों अब भी उन सपनो के सपने देखता है ये मन!

रूठ जाये या मनाये.....या मना के रूठ जाये.....
पर क्यों और किसको ये समझ ना पाता है ये मन!

विचलीत...वीराम चाहता है ये मन,
ना चाहते हुए भी क्यों घबराता है ये मन!

ना जाने क्या चाहता है ये मन..................

Thursday, August 20, 2009

'एक अहसाश'

प्यार तुझको भी है,
प्यार मुझको भी है,
पर इश प्यार की राहो में,
जाने का इनकार तुझको भी है,
इनकार मुझको भी है !

तेरी नीगाहे देखती राह मेरी है
नीगाहे मेरी भी देखती राह तेरी है,

नगरे क्यो झुका लेते हो
देख के मुझको,
ह्या से जाती
लाली
तेरे गालो में
क्यो देख के मुझको !

तुम्हारी झुकी नीगाहे हर वक्त
कहती है कुछ बाते मुझसे,
इकरार करने की चाहत है इनमे
पर ये कह ना पातीहै मुझसे ;

सपनो में खो जाने की चाहत है तुझमे,
चाहत है प्यार से प्यार पाने की तुझमे,
अपने अहसासों को दिल में झुपाए रखे हो,
जाने कीश पल का इंतज़ार है तुम्हे !


Friday, July 24, 2009

सीलसीला!!!!!!!!!!!

रुक गया है ख्वाबो का ये सीलसीला ,
रूबरू हु मै एक सच से ,
ये एक खामोशी सी छाई है ,
जैसे थम रहा हो कोई तुफानो का सीलसीला!

थम गया है रुकने वाली लहरों का , सीलसीला,
ये कसती थम सी गयी है,
इन रुकी हुयी लहरों में,
जैसे थम रहा कोई तुफानो का सीलसीला!

दूर एक धुंधलका सा छाया है,
ये कुछ रेत , हवाओ में,
ये जमीं को छूना नही चाहते,
या हवाए इन्हे छूने नही दे रही ही!

पर...............
रुक गया है ख्वाबो का ये सीलसीला ,
जैसे थम रहा कोई तुफानो का सीलसीला!!!!!!!!!!!

Monday, May 18, 2009

"अहसास "

तलाशती है नज़रे तुम्हे, हंशी फीजाओ में ;
पा के तुम्हे खालिपान का अह्शाश दीलाती है!

हवा के ये झोंके कुछ हंशी याद दीलाती है;
तुझसे की हुई बाते याद आती है!

तेरे हंशी की खनक है इन हवाओ में ;
जो, एक संगीत सा मधुर तान सुनती है!

इन हवाओ में खुशबु की कमी सी लगती है ;
ये, तुम्हरे ना होने का अहसास दीलाती है!

झील के कीनारे कोई 'परी' नही दीखती है;
ये तुम्हारे ना होने का अहसास दीलाती है!

यु ही बस हर वक्त जुदाई सी लगती है....................

Wednesday, May 13, 2009

"एक बहाना"

वो मुलाकात एक बहाना था,
कुछ बाते थी जो तुम्हे बताना था,
कहा भी बहुत सुना भी बहुत,
पर कह पाया जो तुम्हे बताना था,
वो मुलाकात एक बहाना था !

सोचा क्या ये कहने की बात है,
या महसूस करने की;
जो ये राज है छुपा ,
हमारे तुम्हारे दील में !

कुछ तो खाश थी उस मुलाकात में,
बढती गयी हमारी धड़कने,
रोका हमने एक-दुसरे को,
कहने और सुनने के दौर में,
पर, वो मुलाकात एक बहाना था !

दील में थी कुछ बाते तुम्हारे भी, छुपी;
आँखों ने कहा पर कह पाया तुमने,
जागी कुछ बाते तुम्हारे भी दील में,
तुमने सोचा.............
क्या, वो मुलाकात एक बहाना था !


अब एक अहसास है एक खालीपन का,
इस जींदगी में...........
दील में चाहत है, तुमसे;
कुछ कहने की और सुनने की,
फीर एक मुलाकात में.........
पर,वो मुलाकात एक बहाना था !

Tuesday, May 5, 2009

"ये दुरीया"

ये क्या है जीसका अहसास है,
कानो में कुछ संगीत सा अहसास है,
शायद ' ये तो उनकी गुलाबी मुश्कान है!

इन दुरीयो में भी कुछ खाश है,
तन्हाईया देती कुछ अहसास है,
शायद' अब उनका इन्तेजार है!

उनकी मासूमीयत में कुछ बात है,
जो हमेशा बुलाती मुझे पास है,
शायद इशी का मुझे ख्याल है!

...............................

पूछती है 'ये 'दुरीया'
क्या तुमहारे पास है....!
क्या उन्हें भी तुम्हारा,
ख्याल है....!
क्या उन्हें भी इस्का अहसास.....!

Wednesday, April 29, 2009

इक मुलाकात

ख्वाबो में इक मुलाकात हूई,
हां पहली बार हूई;

उस 'परी ' से मुलाकात हूई,
आँखों-आँखों में कुछ बात हूई;

ना जाने क्या बात हूई,
उनकी हंशी से मुलाकात हूई;

जुल्फे थी खुली हूई,
हवा के झोंको से उड़ती हूई;

होठ गुलाब सी खीली हूई,
पंखुडियों सी मीली हूई;

चाँद की चांदनी साथ हूई,
'परी ' दीलके पास हूई;

दील में ऐशी कुछ बात हूई,
हमें भी कुछ अहशास हूई;

पर............

ख्वाबो की ये बात थी,
नींद खुली तो रात थी..................